एक दिन एक किसान के घर उसका एक परिचित मिलने आया। उस समय किसान घर पर नहीं था। उसकी पत्नी ने अतिथि से कहा, “वे खेत पर गए हैं। मैं बच्चे को उन्हें बुलाने के लिए भेज देती हूँ। तब तक आप प्रतीक्षा करें।”
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कुछ ही देर बाद किसान खेत से घर लौट आया। उसके साथ उसका पालतू कुत्ता भी था। कुत्ता तेज़-तेज़ साँस ले रहा था और अत्यधिक थका हुआ दिखाई दे रहा था।
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यह देखकर अतिथि ने किसान से पूछा, “क्या तुम्हारा खेत बहुत दूर है?”
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किसान ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, “नहीं, खेत तो यहीं पास में है। लेकिन आप ऐसा क्यों पूछ रहे हैं?”
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अतिथि ने कहा, “मुझे यह देखकर आश्चर्य हो रहा है कि तुम और तुम्हारा कुत्ता दोनों साथ-साथ आए हो, फिर भी तुम्हारे चेहरे पर थकान का कोई संकेत नहीं है, जबकि कुत्ता बुरी तरह हाँफ रहा है।”
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किसान ने कहा, “हम दोनों एक ही रास्ते से घर आए हैं। मेरा खेत वास्तव में अधिक दूर नहीं है। मैं इसलिए नहीं थका, क्योंकि मैं सीधे मार्ग पर चलते हुए घर आ गया। लेकिन मेरा कुत्ता अपनी आदत से मजबूर है। रास्ते में जब भी उसे कोई दूसरा कुत्ता दिखाई देता, वह उसे भगाने के लिए उसके पीछे दौड़ पड़ता, भौंकता और फिर वापस मेरे पास आ जाता। थोड़ी दूर आगे बढ़ने पर फिर कोई दूसरा कुत्ता दिख जाता और वह उसके पीछे दौड़ने लगता। पूरे रास्ते यही क्रम चलता रहा। इसलिए वह थक गया, जबकि मैं नहीं थका।”
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वास्तव में, आज अधिकांश लोगों की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। जीवन में लक्ष्य प्राप्त करना उतना कठिन नहीं होता, जितना हम स्वयं उसे बना लेते हैं। मार्ग में मिलने वाले आकर्षण, आलोचनाएँ, विवाद, प्रतिस्पर्धाएँ और अनावश्यक व्यवधान हमें बार-बार हमारे लक्ष्य से भटका देते हैं। हम अपनी ऊर्जा इन्हीं में व्यर्थ कर देते हैं और अंततः थक जाते हैं।
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यदि हमें अपने लक्ष्य तक पहुँचना है, तो किसान की तरह अपने मार्ग पर एकाग्र होकर आगे बढ़ना होगा, न कि उसके कुत्ते की तरह हर आवाज़ और हर चुनौती के पीछे भागना होगा। दूसरों की बातों, आलोचनाओं और उकसावों में उलझने के बजाय अपने उद्देश्य पर ध्यान केंद्रित रखें। एक दिन मंज़िल अवश्य प्राप्त होगी।

👉 शिक्षा
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जीवन में सफलता के लिए सही समय की प्रतीक्षा करने से अधिक आवश्यक है सही निर्णय लेना।
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– प्रेम अमूल्य है, उसे सहेजकर रखें।
– क्रोध विनाशकारी है, उसे नियंत्रित रखें।
– भय बाधा है, उसका साहसपूर्वक सामना करें।
– मधुर स्मृतियाँ जीवन की पूँजी हैं, उन्हें संजोकर रखें।
– और सबसे बढ़कर, अपनी ऊर्जा को व्यर्थ के विवादों में न गँवाकर अपने लक्ष्य की ओर निरंतर अग्रसर रहें।